श्री बांके बिहारी मंदिर (वृन्दावन) में अब VIP दर्शन बंद :
यदि आप वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने के लिए वहां जाने का planning बना रहे हैं तो आपको वहां जाने से पहले मंदिर में आरती से लेकर पूजन का नया नियम जरूर जान लेना चाहिए.
बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन में अब VIP एंट्री पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी गई है। यह फैसला 11 सितंबर को मंदिर प्रबंधन की हाई पावर बैठक में लिया गया, जिसमें मंदिर की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर कई अहम निर्णय किए गए। बैठक में यह भी तय किया गया कि मंदिर में प्रवेश केवल निर्धारित प्रवेश द्वार से ही होगा और निकास निर्धारित निकास द्वार से ही किया जाएगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तीन दिन के भीतर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, मंदिर में तैनात सभी पुलिसकर्मी और निजी सुरक्षाकर्मियों को उनकी तय की गई ड्यूटी लोकेशन पर ही तैनात रहना अनिवार्य किया गया है। किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में कार्यरत निजी सुरक्षा स्टाफ को हटाकर उनकी जगह अधिक विश्वसनीय एजेंसी से या रिटायर्ड सैनिकों वाली सिक्योरिटी एजेंसी से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया गया है।

बांके बिहारी मंदिर के दर्शन और आरती का समय:
गर्मियों में: सुबह की आरती: प्रातः 7:00 से 7:15 तक सुबह दर्शन: प्रातः 7:15 से दोपहर 12:30 तक
दोपहर की आरती: 12:30 से 12:45 तक शाम के दर्शन: अपराह्न 4:15 से रात्रि 9:30 तक रात्रि की आरती: 9:30 से 9:45 तक
सर्दियों में: सुबह की आरती: प्रातः 8:00 से 8:15 तक सुबह दर्शन: प्रातः 8:15 से दोपहर 1:30 तक
दोपहर की आरती: 1:30 से 1:45 तक शाम के दर्शन: अपराह्न 4:00 से रात्रि 9:00 तक
रात्रि की आरती: 9:00 से 9:15 तक आरती होगी। दर्शन के लाइव स्ट्रीमिंग पर सभी ने सहमति जताई, लगातार लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी।
बांके बिहारी मंदिर के दिव्य दर्शन
वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी जी के मंदिर में एक अनोखी परंपरा है। कहा जाता है कि उनकी मूर्ति इतनी जीवंत और आकर्षक है कि यदि कोई उन्हें लगातार देखता रहे, तो वह मानो श्रीकृष्ण की भक्ति में इतना लीन हो जाता है कि संसार से नाता तोड़ देता है।
इसी कारण, मंदिर में उनकी प्रतिमा के सामने एक पर्दा लगा रहता है, जो हर कुछ क्षणों में खिसका दिया जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी भक्त उन्हें लगातार एकटक न देख सके।
भक्तों का मानना है कि बांके बिहारी जी की आँखों में ऐसा सम्मोहन है कि जो भी उन्हें देखता है, वह उनकी ओर खिंचता चला जाता है। उनकी मूर्ति के दर्शन करते समय लोगों की आँखों से अपने आप आंसू बहने लगते हैं – जैसे आत्मा अपने प्रियतम से मिलकर भाव-विभोर हो गई हो।
यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि स्वयं ठाकुर जी की लीला है – जो भक्त और भगवान के मिलन को एक अनोखे रूप में प्रकट करती है।
हर 2 मिनट के लिए बांके बिहारी के मंदिर में पर्दा क्यों डाला जाता है?
बांके बिहारी मंदिर में पर्दा डाले जाने की परंपरा के पीछे एक रोचक और भावनात्मक कथा जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि करीब 400 वर्ष पहले इस मंदिर में दर्शन के समय कोई पर्दा नहीं डाला जाता था। भक्तजनों को जितनी देर इच्छा होती, वे भगवान के दर्शन कर सकते थे।
इसी दौरान एक दिन एक साधक मंदिर में आया और अत्यंत प्रेम और भक्ति भाव से भगवान बांके बिहारी के दर्शन में लीन हो गया। उसकी भक्ति इतनी गहरी थी कि स्वयं भगवान उसके प्रेम से आकर्षित होकर उसकी ओर चल पड़े। जब पुजारी ने यह अद्भुत दृश्य देखा और मूर्ति को स्थान पर न पाकर घबरा गया, तो उसने भगवान से प्रार्थना की कि वे वापस मंदिर में विराजमान हो जाएं।
इस घटना के बाद से ही यह परंपरा शुरू हुई कि हर थोड़े-थोड़े समय में भगवान के सामने पर्दा डाला जाए, ताकि कोई भक्त उन्हें इतनी देर तक लगातार न देख सके कि भगवान फिर किसी के प्रेम में बंधकर साथ चल पड़ें। आज भी हर कुछ मिनटों में भगवान के आगे पर्दा डाला जाता है — यह भक्त और भगवान के उस मधुर संबंध की एक अनुपम याद है।
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